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आध्यात्मिक लाभ तथा पूर्ण मोक्ष कैसे मिले ?
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यह विचार ही भ्रांति पुरण हैं कि धन,वैभव, मान सम्मान तथा पद प्रतिष्ठा पा लेने से जीवन सफल हो जाता हैं। वर्तमान में सभी यही लालसा पाले अपना कर्म कर रहे हैं। जो हर किसी को नहीं प्राप्त होती है। मनुष्य आज अगर सुखी या दुखी हैं तो यह उसके पिछले पाप ओर पुण्यों की देन है।मानव इन सुखों को पाने के लिए कोई भी पाप करने से नहीं हिचकिचाहट करता है।वह इन सुखों को पाने के लिए दिन रात प्रयत्नशील रहता है।जबकि मिलता उसे उतना ही है जितना उसके प्रारब्ध मे है। अब आप सोच रहे होगे कि फिर यह सुख केसे प्राप्त कर सकते हैं तो उसके लिए हमें हमारे शास्त्रों को समझना होगा। शास्त्र अनुसार भक्ति करने से ही सभी सुख प्राप्त होते है। हिन्दुऔ के पवित्र ग्रंथ गीता जी मे कहा है " संसार की सभी सुखों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण परमात्मा की साधना करनी चाहिए। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 मे लिखा है कि शास्त्र विधि त्याग कर मन माना आचरण करने से ना तो सिद्धि प्राप्त होती है,ना सुख प्राप्त होता है और ना ही परम गति होती है अर्थात मन माना आचरण व्यर्थ है। तो फिर ह...
संत कबीर साहिब
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वैष्णव संत आचार्य रामानंद को कबीर जी अपना गुरु बनाना चाहते थे।लेकिन रामानंद जी नीच जाती वाले को पसंद नहीं किया करते थे।उनके मन में एक विचार आया कि स्वामी रामानंद जी सुबह चार बजे गंगा स्नान जाते हैं उसके पहले ही उनके जाने के मार्ग में सीढ़ियों लेट जाऊँगा और उन्होंने ऐसा ही किया। एक दिन, एक पहर रात रहते ही कबीर पंचगंगा घाट की सीढ़ियों पर गिर पड़े। रामानन्द जी गंगास्नान करने के लिये सीढ़ियाँ उतर रहे थे कि तभी उनका पैर कबीर के शरीर पर पड़ गया। उनके मुख से तत्काल 'राम-राम' शब्द निकल पड़ा। उसी राम को कबीर ने दीक्षा-मन्त्र मान लिया और रामानन्द जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया। जब कबीर जी पाच साल के हो चुके थे तो वह जहाँ कहीं भी सत्संग या पुराणों का पाठ होता रहता था तो वहाँ पहुंच कर उन गुरुऔ को बताया करते थे कि "आप जो ज्ञान बता रहे हो वह सब उलटा बता रहे हो ओर शास्त्रौ मे ऐसा नहीं लिखा है"तब वह गुरू उनको मारने दोडते ओर कहते कि "यह तो बालक है ओर अनपढ हैं इसे क्या पता शास्त्रौ मे क्या लिखा है।और एक दिन ऐसे ही कबीर जी रामानंद जी के शिष्य जो सत्संग कर रहा था वहाँ पहुंच कर...
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पूर्णपरमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है। प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 पूर्ण परमात्मा सब कुछ कर सकते हैं आप भी देखिये ये जीता जागता उदाहरण https://youtu.be/CqKzmPO6Dvs रूपाली पाटील पूना महाराष्ट्र से जिनकी कैंसर जैसी लाइलाज बिमारी केवल संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर शास्त्र अनुकूल साधना करने से ही जड़ से समाप्त हो गई... अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर विजिट करे।